राजनीति / अंतरराष्ट्रीय 300 SIR: प. बंगाल से ‘रिवर्स एक्सोडस’ जब भारत–बांग्लादेश सीमा पर सालों से अंधेरे में पार होने वाली परछाइयाँ उजाले में लौटने लगें, तो यह सिर्फ़ पलायन नहीं—एक ऐतिहासिक दरार का उद्घोष है। हाक... अनवर हुसैन 01 Dec 2025
राजनीति / अंतरराष्ट्रीय 278 पूर्वी मोर्चा, गहराता भू-संकट पूर्वी मोर्चा एक बार फिर उबलने लगा है। ढाका की गलियों से उठता कट्टरपंथ, पाकिस्तान–तुर्की–चीन की छाया और सिलीगुड़ी पर बढ़ती भू-रणनीतिक नजरें—ये सब मिलक... संदीप कुमार 01 Dec 2025
राजनीति / अंतरराष्ट्रीय 490 ट्रंप का H-1B दांवः संरक्षणवाद या अमेरिका का आत्मघाती गोल? एच-1बी वीज़ा को सिलिकॉन वैली के अदृश्य आधार स्तंभ की तरह देखें – वह बुनियाद जिसने न केवल अमेरिका के तकनीकी उद्योग को मज़बूत और तेज़ बनाने में मदद की, ... संतु दास 30 Sep 2025
राजनीति / अंतरराष्ट्रीय 281 द्वी-राष्ट्र समाधानः‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ का क्षण मध्य-पूर्व का इज़रायल-फिलिस्तीन संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि दशकों से अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति, मानवाधिकार और वैश्विक भू-राजनीति की एक जटि... संदीप कुमार 30 Sep 2025
राजनीति / अंतरराष्ट्रीय 224 प्रेत युद्धः अमेरिका का भ्रम अमेरिका ने चीन को हमेशा एक अस्तित्वगत खतरे के रूप में पेश किया है—एक उभरती शक्ति जो विश्व व्यवस्था को चुनौती देने को तैयार है। लेकिन हकीकत में चीन केव... जलज श्रीवास्तव 30 Sep 2025
राजनीति / अंतरराष्ट्रीय 254 RIC: अग्निपथ ! अग्निपथ ! अग्निपथ ! (आवरण कथा) शीत युद्ध की राख से उठी एकध्रुवीय दुनिया अब अपने ही बोझ तले चरमराने लगी है। पश्चिमी वर्चस्व की दीवारों में दरारें गहरी होती जा रही हैं और उसी दरकन में... श्रीराजेश 02 Sep 2025
राजनीति / अंतरराष्ट्रीय 245 ब्रोमांस की राख पर नया ग्लोबल भूचाल (आवरण कथा) 'हाउडी मोदी' से गूंजते स्टेडियम और 'नमस्ते ट्रंप' की चमकते लम्हें अब इतिहास बन चुके हैं। दोस्ती की वह गर्मजोशी राख में बदल चुकी है—और उसी राख से उठा ह... सचिदानंद 02 Sep 2025
राजनीति / अंतरराष्ट्रीय 265 BMD का सवाल, सुरक्षा या सर्वनाश? भारत को वर्तमान में अपनी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणाली को विकसित करने के लिए गंभीर और ठोस प्रयास करने की ज़रूरत है। जिस प्रकार से चीन अपनी बीएम... कार्तिक बोम्माकांति 01 Aug 2025
राजनीति / अंतरराष्ट्रीय 321 क्या भारत बन सकता है वैश्विक व्यापार का नया स्तंभ ? बिखरती वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत एक नई आर्थिक धुरी बनने की ओर अग्रसर है। यह लेख विश्लेषण करता है कि क्या भारत उभरती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नई ... रिया गोयल 01 Aug 2025